दूध वाली देसी आंटी की मस्त चुदाई


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(Doodh Wali Desi Aunty Ki Mast Chudayi)

दोस्तो, मेरा नाम प्रिन्स है. मैं जामनगर, गुजरात का रहने वाला हूँ. यह कहानी तब की है जब मैं अपने चाचा के घर गाँव में गया हुआ था. वहाँ पर रहते हुए कुछ दिन ही हुए थे कि मुझे पता चला कि वहाँ पर चाचा के घर में एक आंटी दूध बेचने आती थी. वह कमाल का देसी माल लगती थी.
उस आंटी की उम्र 30 साल के आस-पास रही होगी. जब मैंने उसको पहली बार देखा तो मैं उसके बड़े-बड़े चूचों का साइज देखता ही रह गया. उसके चूचे ब्लाउज मैं समा नहीं रहे थे और उनकी दरार उसके ब्लाउज के बाहर तक आकर साफ-साफ दिखाई दे रही थी.

पहली बार जब मैंने उस आंटी को देखा तो मैं रोज उसका ही इंतजार करने लगा था. दूध लेने के बहाने मैं उसके मोटे-मोटे और बड़े चूचों को देखकर अपनी आंखें सेंक लिया करता था. धीरे-धीरे मैंने उससे बात करनी भी शुरू कर दी थी. चार-पांच दिन में ही वह आंटी मेरे साथ घुल-मिल गई थी. मैं भी उस आंटी के साथ हंसी-मजाक करने लगा था.

एक दिन की बात है जब मेरे चाचा-चाची दोनों ही किसी काम के सिलसिले में बाहर गए हुए थे. उस दिन वह दोनों मुझे यह बोल कर गये थे कि वह लोग अगले दिन ही आएंगे. अब एक दिन मुझे घर पर अकेले ही रहना था. मैं भी ऐसे किसी दिन का काफी समय से इंतजार कर रहा था. चाची-चाची सुबह ही जा चुके थे और आंटी कुछ देर के बाद ही दूध देने के लिए घर पर आई.

हम दोनों में एक दो बात हुई और फिर मैंने आंटी के साथ मजाक करना शुरू कर दिया. मैंने मजाक में ही आंटी से कह दिया- आंटी, लगता है कि आपके पास बहुत ही ज्यादा दूध होता है.
यह कहते हुए मैं आंटी के चूचों की तरफ देख रहा था.

आंटी ने मेरी तरफ देखा और उनको भी इस बात का अहसास हुआ कि मैं उनके चूचों को ही देख रहा हूँ.
आंटी ने कहा- हाँ, मेरे तो पास तो बहुत सारा दूध है. अगर तुम देखना चाहते हो कि मेरे पास कितनी भैंस हैं और कौन सी भैंस कितना दूध देती है तो उसके लिए तुमको मेरे खेत पर आना होगा.
मैंने सोचा कि यही मौका है आंटी के चूचों तक पहुंचने का, मैंने कहा- ठीक है आंटी, आप ऐसा करना कि आप शाम को दूध लेकर घर पर मत आना. मैं ही आपके खेत पर आकर खुद ही दूध ले जाऊँगा.
आंटी ने कहा- ठीक है. तुम खुद ही ले जाना.

अब मुझसे शाम होने का इंतजार करना भारी हो रहा था. मेरा लंड तो पहले से ही आंटी के बारे में सोच कर खड़ा होने लगा था. मैं मन ही मन आंटी के चूचों को दबाने और उनकी चूत को चोदने के ख्याली पुलाव पकाने लग गया था. बड़ी ही मुश्किल से शाम का वक्त आया और मैं जल्दी से नहा-धोकर तैयार होने लगा. शाम के लगभग 7 बज चुके थे. मैं दूध लेने के लिए निकल पड़ा और रास्ते में ही अंधेरा हो चुका था. मैं आंटी के खेत पर पहुंच गया.

उन्होंने खेत के पास ही अपना घर बनाया हुआ था. मैं गया तो आंटी ने घर के लोगों से मिलवाया और सब को ये भी बता दिया कि मैं उनकी दूध की डेरी को देखने के लिए आया हूँ.

सब लोग खुश हो गये और आंटी के साथ मैं उनके तबेले की तरफ गया जहाँ पर आंटी ने भैंसों को रखा हुआ था. आंटी एक-एक करके मुझे सारी भैंसों को दिखाने लगी.
फिर आंटी ने पूछा- बताओ, तुम्हें कौन सी भैंस में दूध ज्यादा लगता है.
मैंने कहा- आंटी, मैं जिस भैंस की बात कर रहा था वह तो यहाँ पर दिखाई ही नहीं दे रही.
आंटी बोली- किस भैंस की बात कर रहे थे तुम?
मैंने आंटी के चूचों की तरफ देखा और फिर यहाँ-वहाँ देखकर यह सुनिश्चित किया कि कोई आस-पास में न हो. मैंने अगले ही पल आंटी के चूचों को अपने हाथ से दबा दिया और कहा- मैं तो इस वाली भैंस की बात कर रहा था आंटी.

आंटी ने मेरी तरफ शरारत भरी नजर से देखा और वहाँ से चलकर सीधी सामने वाले गन्ने के खेत में जा घुसी. मैं भी आंटी के पीछे-पीछे खेत में घुस गया और पीछे से जाकर आंटी को पकड़ लिया. मैं उनके चूचों को दबाने लगा और आंटी छुड़वाने का नाटक-सा करने लगी.
बोली- छोड़ो मुझे, क्या कर रहे हो, कोई देख लेगा!
मैंने कहा- आह्ह … अब इस वक्त इतने अंधेरे में कौन देखेगा. आप मजा लो आंटी. मैं बहुत दिन से आपके दूध को पीने के लिए तरस रहा था. क्या आप का मन नहीं करता कि कोई आपके इन बड़े-बड़े दूधों को दबाकर इनका दूध निकाले?

मैं आंटी के चूचों को तेजी के साथ अपने हाथ से मसलने लगा. आंटी मेरी तरफ घूम गई तो मैंने उनके होंठों को चूसना भी शुरू कर दिया. उनके होंठों को चूसते हुए मैंने आंटी के ब्लाउज के अंदर हाथ डाल दिया. हाथ डाल कर मैंने आंटी के चूचों को मसलना और सहलाना शुरू कर दिया. आंटी गर्म होने लगी और मेरे होंठों को चूसने में अपना पूरा सहयोग देने लगी.

मेरा लंड मेरी पैंट में तन कर खड़ा हो गया था और आंटी की साड़ी के ऊपर से ही आंटी के बदन में छेद करने के लिए तड़पता हुआ अपना सिर आंटी की जांघों पर पटक रहा था.
आंटी को जब मेरे लंड का अहसास हुआ तो आंटी ने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर मेरे लंड को मेरी पैंट के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया और मेरे लंड को सहलाते हुए बोली- मैंने भी बहुत दिनों से इसका दूध नहीं पीया है.

मैंने कहा- ठीक है आंटी, आप मुझे अपना दूध पिला दो और मैं आपको अपना दूध पिला देता हूँ. आह्ह … उम्म … करते हुए मैं आंटी के चूचों को मसलते हुए उनके होंठों को चूसता जा रहा था.
आंटी ने कुछ ही देर के बाद मेरी पैंट को खोलना शुरू कर दिया. उन्होंने मेरी पैंट को खोल कर मेरी जांघों से नीचे कर दिया और खुद भी नीचे बैठ गई. आंटी ने नीचे बैठते ही मेरे अंडरवियर के ऊपर से ही मेरे तने हुए लंड को किस किया और फिर उसको अपने हाथों से सहलाने लगी.
आह्ह् … उफ्फ … मेरे मुंह से कामुक सिसकारी निकल गई. आंटी ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और उसको अंडरवियर के ऊपर से अपने हाथ में भर कर दबाने लगी.

उसके बाद आंटी ने मेरे अंडरवियर को नीचे खींच दिया और मेरा लंड नंगा हो गया. आंटी ने मेरे खड़े लंड को अपने मुंह में भर लिया और उसको पूरा मुंह में लेकर चूसने लगी. आह्ह् … ओह्ह … मैं तो पागल हो गया आंटी के मुंह में लंड देकर. इतना मजा मेरे लंड को कभी नहीं आया था. मेरा लंड अपने पूरे आकार में आ चुका था और 7 इंच लम्बा हो चुका था जिसे आंटी पूरा का पूरा अपने गले में उतार रही थी.

आंटी ने कहा- तुम्हारा यह लंड तो बहुत ही मजेदार है. क्या ये इतना ही मजबूत भी है?
मैंने कहा- आंटी, आप खुद ही देख लो अंदर लेकर. आपको पता लग जाएगा कि मेरा यह लंड कितना दमदार है.

यह कहकर मैंने आंटी को नीचे लेटा दिया और उनकी साड़ी को ऊपर करके उनकी चूत को सहलाने लगा. आंटी की चूत बहुत ही मजेदार थी. वह मेरे लंड के टच होने की वजह से गीली भी होना शुरू हो गई थी. मैंने आंटी की चूत को सहलाना जारी रखा और एक हाथ से आंटी के बोबों को भी दबाना जारी रखा.
आंटी बोली- मैं तो बहुत दिनों से प्यासी हूँ मेरे राजा … आह्ह् … तुम पहले क्यों नहीं मिले मुझे?
मैंने कहा- आंटी आप चिंता मत करो, मैं आज आपकी प्यास को अच्छी तरह से बुझा दूंगा. मैं भी इसी मौके की तलाश में था कि कब आपकी चूत को चोदने का अवसर मुझे मिलेगा.

यह कहकर मैंने आंटी की चूत पर अपने होंठ रख दिये और उनकी चूत को चूसने लगा. आंटी के मुंह से जोरदार सिसकारी निकलना शुरू हो गई. आह्ह् … उई माँ … ओह्ह … उफ्फ … जैसी आवाजें उनके मुंह से निकल रही थीं जो मेरे जोश को हर पल और ज्यादा तेज कर देती थी.

कुछ देर तक मैंने आंटी की चूत को जी भर कर चूसा और चाटा मगर आंटी जल्दी ही पागल होने लगी. उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठों को चूसने लगी. मेरा लंड आंटी की चूत पर जा लगा. आंटी अपनी चूत को उठाकर मेरे लंड की तरफ धकेल रही थी. मैंने आंटी के मन की बात समझ ली थी. मगर मैं आंटी को अभी थोड़ी और गर्म करना चाहता था.
मगर आंटी ने नीचे से हाथ ले जाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसको अपनी चूत पर लगाने की कोशिश करने लगी.
आंटी बोली- बस … अब और देर न करो, मुझसे अब रुका नहीं जा रहा. जल्दी से अपने लौड़े को मेरी चूत में डाल दो. मैं तुम्हारे लंड को अपनी चूत में अंदर तक लेने के लिए तड़प रही हूँ मेरे राजा!
मैंने कहा- आंटी, मैं भी आपकी चूत को चोदने के लिए तड़प रहा हूँ.
आंटी बोली- तो फिर अपने लंड को मेरी चूत में डाल दो न, तुम देर क्यों कर रहे हो? मैं अब और नहीं रुक सकती. आह्ह् …

मैंने अपने लंड के टोपे को थोड़ा सा पीछे किया और आंटी ने भी मेरे लंड को पकड़ लिया और अपनी चूत के मुंह पर सेट करवा लिया. आंटी ने फिर मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरा लंड आंटी की चूत में अंदर सरकने लगा. आंटी की चूत को फैलाता हुआ मेरा लंड आंटी की चूत में रास्ता बनाने लगा और कुछ ही पल में एक तगड़े झटके के साथ आंटी की चूत की तलहटी में जाकर बैठ गया.

मैंने आंटी के बोबों को अपने दांतों से काटना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे आंटी की चूत में अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. आंटी की गीली चूत में लंड गच-गच की आवाज करता हुआ आंटी की चूत को चोदने लगा.

आंटी के मुंह से निकलने वाली कामुक सिसकारियां और तेज हो गईं. मम्म … आआ … आह्ह् … अह्ह … यह्ह् … स्स्स … करती हुई आंटी मेरे लंड से चुदाई का मजा लेने लगी.
मैं गचागच आंटी की चूत की चुदाई करता जा रहा था. उसके बाद आंटी ने मुझे उठने के लिए कहा और खुद मुझे नीचे लेटने के लिए बोला. आंटी ने मुझे नीचे लेटा दिया और मेरे लंड पर बैठ गई. आंटी ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और अपनी चूत पर लगाकर मेरे लंड पर बैठती चली गई. आंटी की चूत में मेरा लंड गचाक करके उतर गया.

आंटी मेरे लंड पर बैठकर खुद ही ऊपर नीचे होने लगी. मेरे लंड पर बैठ कर आंटी सवारी कर रही थी और उसके मुंह से कामुक सिसकारियां निकलती जा रही थीं. आंटी दस मिनट तक मेरे लंड पर बैठ कर कूदती रही और जब थकने लगी तो आंटी ने उठते हुए मेरा लंड उनकी चूत से निकाल लिया. उसके बाद मैंने आंटी को वहीं पर कुतिया बना दिया और घुटनों के बल बैठ कर पीछे से आंटी की चूत में लंड को पेल दिया.
मैंने आंटी के बालों को पकड़ लिया और एक हाथ गांड पर रख कर लंड को चूत में धकेलने लगा. मेरे मुंह आह्ह … ऊहह … की आवाजें निकलने लगीं. आंटी के मुंह से कामुक सिसकारियों के साथ अब हल्की-हल्की दर्द भरी आवाजें भी निकल रही थीं.

मैंने आंटी की चूत की जबरदस्त चुदाई जारी रखी. आंटी की चूत चोदने में जो मजा उस वक्त आया वह किसी और चीज में नहीं आ सकता था. उसकी गीली और गर्म चूत की चुदाई करते हुए मैं जन्नत के मजे लेने लगा था.
आंटी कुछ ही देर के बाद जोर से चीखती हुई झड़ गई और मेरा लंड अब पूरी तरह आंटी की चूत के रस से नहा गया था. लंड फच्च-फच्च की आवाज करता हुआ आंटी की चूत की चुदाई करने में लगा रहा. मैंने उसके बाद आंटी के चूचों को नीचे से हाथ ले जाकर फिर से दबाना शुरू कर दिया और आंटी की कमर पर झुक कर उसके चूचों को दबाने लगा.

मेरे लंड का कंट्रोल अब मेरे हाथ से छूटता जा रहा था. जल्दी ही मेरा वीर्य छूटने वाला था, लेकिन मैं अभी आंटी की चूत को कुछ और देर चोदने के मजे लेना चाहता था. इसलिए मैंने आंटी की चूत की चुदाई को बीच में ही रोक दिया और आंटी के चूचों के निप्पल को अपनी चुटकी में लेकर काटने लगा.

आंटी पागल सी होने लगी. वह मेरी गांड को पकड़ कर खुद ही अपनी चूत में मेरे लंड को धकेलने की कोशिश करने लगी मगर मैं पूरा लंड आंटी की चूत में अंदर तक नहीं जाने दे रहा था. आंटी ने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को पकड़ कर अपनी चूत की तरफ धकेलने की कोशिश की. मगर मैं बीच में लंड को रोक लेता था. मैंने अब आंटी की गांड के छेद को टटोलना शुरू कर दिया और अपनी एक उंगली आंटी की गांड में डाल दी. आंटी उचक गई.
आअह्ह … क्या कर रहा है हरामी? कहां उंगली डाल रहा है? आंटी ने मुझे पीछे धकेलते हुए कहा.
मगर मैंने आंटी की बात को अनसुना कर दिया.
मैंने एक उंगली को आंटी की गांड में चलाना शुरू किया और धीरे-धीरे आंटी की गांड में पूरी उंगली अंदर तक जाने लगी. कुछ देर विरोध करने के बाद आंटी ने विरोध करना बंद किया और आराम से अपनी गांड में मेरी उंगली को रास्ता देने लगी. एक उंगली के बाद मैंने दूसरी उंगली आंटी की गांड में डाली और दोनों ही उंगलियों को साथ-साथ अंदर-बाहर करने लगा. आंटी फिर से आवाजें करने लगी.

कुछ देर तक उंगलियों को गांड में चलाने के बाद मैंने लंड को फिर से चूत में डाल दिया और ताबड़तोड़ स्पीड के साथ आंटी की चूत को फिर से चोदना शुरू कर दिया. आंटी फिर से कराहने लगी.
मेरा लंड जब आंटी की चूत की गहराई में जाकर लग रहा था और जब मेरे लंड की जड़ आंटी की गांड से टकराती तो फट्ट की आवाज हो जाती थी. इतनी ही स्पीड से मैं आंटी की चूत को रगड़ने लगा. आंटी का बदन दूसरी बार अकड़ने लगा और आंटी फिर से झड़ गई.

इस बार मैंने चुदाई को बीच में नहीं रोका और मैं पूरी गति के साथ आंटी की चूत की चुदाई करता रहा. आंटी के चूचों को दबा-दबा कर मैंने आंटी को बावली कर दिया था.
आंटी बोली- बस कर, आज तू मेरी ही जान ही निकाल देगा हरामखोर!
मैंने कहा- आह्ह … मेरी दूधवाली आंटी … ओह्ह … बस कुछ देर और चुदवा लो, मेरा निकलने वाला है.
आंटी बोली- जल्दी कर राजा! घर में सब इंतजार कर रहे होंगे. अगर कोई खेत की तरफ आ गया तो मुसीबत आ जायेगी.
मैंने कहा- कोई बात नहीं आंटी, बस होने ही वाला है. आह्ह … ओहह्ह … आह्ह …

मैंने चार-पांच जोर के धक्के लगाए और आंटी की चूत में अपना माल गिराना शुरू कर दिया. हाह … आह्ह् … हम्म … करते हुए मैं आंटी की चूत में अपने लंड को खाली करने लगा.
आंटी भी थक कर चूर हो गई और नीचे जमीन पर ही गिरने वाली थी.
अपना लंड आंटी की चूत में खाली करने के बाद मैं आंटी के ऊपर ही लेट गया और पांच मिनट तक हम वहीं खेत में पड़े रहे.

उसके बाद आंटी उठने लगी तो मैं आंटी के ऊपर से हट गया. आंटी ने अपने कपड़े ठीक किए और मैंने भी अपने कपड़े ठीक कर लिये. हम दोनों बाहर निकलने लगे तो आंटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया. उसने मेरे होंठों पर एक लम्बा सा किस किया और मुझे पीछे ही रोक लिया.
मुझे पीछे रख कर आंटी खुद आगे आ गई. उसने खेत से बाहर निकल कर झांका और देखा कि कोई देख तो नहीं रहा है. उसके बाद आंटी फिर से खेत में घुसी और मेरे होंठों को चूसने लगी. मैं भी आंटी के होंठों को चूसने लगा. उसके बाद आंटी ने मुझे पीछे धकेल दिया और खेत से बाहर निकल आई.

मैं भी आंटी के बाद कुछ पल का विराम देकर खेत से बाहर आ गया और हम आगे बढ़ने लगे.
उसके बाद हम दोनों तबेले की तरफ वापस आ गये और आंटी ने मेरे डिब्बे में दूध भर दिया.

आंटी के चेहरे पर खुशी की झलक दिखाई दे रही थी. उसके बाद मैं दूध लेकर वहाँ से आ गया.
सुबह जब आंटी घर आई तो आंटी मुझे देख कर मुस्कराने लगी. आंटी काफी खुश लग रही थी.
मैंने दरवाजा बंद कर दिया और एक तरफ ले जाकर आंटी के चूचों को ऊपर से ही दबा दिया.

आंटी बोली- आराम से करो, कल से इनमें बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने आंटी को छोड़ दिया और आंटी वापस चली गई. उसके बाद काफी दिन तक मैं अपने चाचा-चाची के घर पर ही रहा और जब भी मौका मिलता मैं दूध वाली आंटी की चूत की चुदाई कर देता.
अब आंटी माँ बनने वाली है. मुझे पता है कि दूध वाली आंटी के पेट में मेरा ही बच्चा है. मैंने चोद-चोद कर आंटी की चूत का भोसड़ा बना दिया था. मगर साथ ही साथ आंटी को प्रेग्नेंट भी कर दिया.

आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी, इसके बारे में आप कहानी पर कमेंट जरूर करें. मैंने नीचे अपना मेल-आईडी दिया है. आप मुझे मैसेज करके जरूर बताएँ. अगर कहानी में कुछ गलती हो गई हो तो मैं आपसे माफी चाहता हूँ.
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