बहन बनी सेक्स गुलाम-2


(Behan Bani Sex Gulam- Part 2)

This story is part of a series:

पिछले भाग में आपने पढ़ा था कि मेरी बहन को कुछ नया करने का मन था तो मैंने उसको अपने कमरे में ले जा कर नये तरीके से चोदा. उस रात की चुदाई के बाद वह काफी खुश लग रही थी.
अब अगली सुबह की बात बता रहा हूँ:

मेरी बड़ी बहन प्रीति मेरी तरफ देख रही थी. मैं उसकी तरफ देख रहा था. उसकी नजर एक बार मेरे अंडरवियर पर जा रही थी और फिर ऊपर आ जाती थी. मेरी नजर उसके चूचों से फिसल कर उसकी चूत पर चली जाती थी और फिर ऊपर आ जाती थी.
मैंने पूछा- तुम तो सिर्फ कॉफ़ी लायी हो?

प्रीति ने ट्रे से ब्रैड उठाया और मुझसे बोली- आज मैं ही तुम्हारा नाश्ता हूँ जान, आ जाओ, खा लो मुझे.

इतना कहकर उसने जैम की शीशी उठा ली.
मैंने देखा कि वो अपने नंगे चूचों पर जैम लगा रखी थी। मैं मुस्कुराया और उसे खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया और ब्रेकफ़ास्ट करने लगा। वो मादक सिसकारियां भर रही थी। मैं जब भी उसके चूचों से जैम चूसता वो सिर को ऊपर उठा कर आँख बंद किये हुए होंठ भींच कर मजे लेने लगती। ऐसे ही मैंने अपना ब्रेकफास्ट किया।

मैं बोला- चलो हो गया नाश्ता।
उसने कामुक अंदाज में एक मुस्कराहट के साथ मुझे देखा और बोली- अभी कहाँ मेरी जान!

वो उठी और जैम की बोतल उठा कर कमरे से बाहर निकल गई. मैं भी उसके पीछे-पीछे चल पड़ा. हॉल में जाकर वह डाइनिंग टेबल पर अपने पैर चौड़े करके बैठ गयी. उसकी बुर मेरे मुँह के बिल्कुल सामने थी। उसने टेबल से जैम की बोतल ली और ढ़ेर सारा जैम अपनी चूत पर लगा लिया।
मैंने उसकी आँखों में देखा और मुस्कुराया और अपना मुंह उसकी चूत में लगा दिया।

मेरी जीभ का स्पर्श पाते ही वो चिहुँक उठी. उसने एक हल्की मीठी सी सिसकारी ली- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आम्म … हह आहह हह्ह!
वह आँखें बंद करके मजे लेने लगी. मैं जोर-जोर से उसकी चूत को चूसने लगा. उसकी सिसकारियां तेज होने लगीं.

हॉल में डाइनिंग टेबल पर बिल्कुल नंगी बैठी हुई मेरी बहन मुझसे अपनी सेक्सी चूत चटवा रही थी. मैं भी अंडवियर में ही था। हमें किसी का डर नहीं था. हम घर में बिल्कुल अकेले थे।

मैंने एक सेकेंड के लिए देखा तो उसकी आँखें बंद थीं और वह सिर ऊपर किये वासना की गहराइयों में गोते लगा रही थी। उसके हाथ उसके बालों में थे जिससे कि उसके आर्मिपिट्स दिख रहे थे।
इस हालत से मुझे कल का सीन याद आ गया. जब मैं कल उसके आर्मपिट्स को चाट रहा था। कल रात पहली बार मैंने किसी लड़की के साथ ऐसा किया था। उसे वासना विभूत ऐसे हालात में देख कर मैं पगला गया और उसकी चूत जोर-जोर से चूसने लगा। जैम तथा उसके चूत रस की मिली हुई खुशबू मुझे पागल कर रही थी।

उसकी सिसकारियां तेज होने लगी, मेरा सिर वो अपनी बुर पर दबाने लगी। कुछ ही पल में उसका बदन अकड़ने लगा और वो फव्वारे के साथ झड़ने लगी। मैं उसकी चूत के रस को पी गया।
वो कुछ देर के बाद शांत हुई।

मैंने उठा कर उसे वहीं डाइनिंग टेबल पर ही आधा लिटा दिया। मैं उसकी स्थिति को बता देता हूँ। वो कमर से ऊपर तक डाइनिंग टेबल पर लेटी हुई थी। कमर से नीचे अपने पैरों पर खड़ी थी। हाथ आगे की तरफ किये डाइनिंग टेबल के उस छोर को पकड़े हुई थी। उसके चूतड़ हवा में उठे हुए थे।

मैंने उसके चूतड़ों पर चपत लगाना चालू किया। मैं जोर-जोर से चपत लगता और पूछता- कैसा लग रहा है?
वो बोलती- ईट्स वन्डरफुल मास्टर (यह बहुत ही अच्छा है मेरे मालिक)
“डु यू वांट मोर?”(क्या तुम्हें और चाहिए)
वो बोलती- यस प्लीज सर! (हाँ! कृपया और कीजिए)
हर वार के साथ वो चिहुँक जाती। उसके मुंह से आह! निकल जाती।

मुझे पता था उसे दर्द हो रहा है लेकिन मैं आश्चर्यचकित था कि उसके चेहरे पर कोई दुःख का भाव ही नहीं था। वो दांतों को भींचे हुए आँखें बंद किये हुए आनंद ले रही थी। उसका यह रूप मुझे और भी उत्साहित कर रहा था। मेरे द्वारा चपत लगाने से उसके चूतड़ बिल्कुल लाल हो गए थे। मैं उसे इस हालत में देख कर इतना उत्तेजित हो गया कि झटके से मैंने अपना कच्छा निकाला और उसकी गर्दन को पकड़ कर पीछे टेबल पर दबा दिया.

पहली बार में ही पूरा लौड़ा पेल दिया उसकी चूत में जिससे वो कराह उठी। उसे दर्द हुआ लेकिन उसने कुछ नहीं बोला। धक्का इतना तेज था कि वो टेबल पर आगे खिसक गयी थी। मैंने धक्के लगाने चालू किये। उसने सिसकारियां लेना चालू किया। वो जोर-जोर से सिसकारियां ले रही थी।
आहहहह … उहह! की आवाजें पूरे हॉल में गूंज रही थीं। उसकी मखमली पीठ मेरे सामने थी। गोरी रण्डी सूरज की हल्की सी रौशनी में संगमरमर की तरह चमक रही थी।

मैं अचानक से रुका और उसके पीठ पर हाथ फेरते हुए आगे की तरफ झुका। अचानक धक्के रुक जाने से उसने पीछे मुड़ के थोड़ी परेशानी के भाव से मुझे देखा. मैंने उसके कानों में धीरे से कहा- डोंट मूव! (इसी अवस्था में रहना, हिलना मत!)
उसने हामी में सिर हिलाया।

मैं उसे वहीं हॉल में डाइनिंग टेबल पर नंगी छोड़ कर उसके बेड रूम में गया जहाँ कल रात मैंने उसकी चुदाई की थी। वहां से मैंने वो पतली सी रस्सी ली जिससे मैंने उसे कल बांधा था। फिर मैं वापस हॉल में आ गया। मेरे आने तक वो वैसे ही डाइनिंग टेबल पर पड़ी थी। चूतड़ों को हवा में उठाये, अध-लेटी अवस्था में। जाते ही मैंने लौड़ा उसकी चूत में पेल दिया। उसकी तो जैसे जान में जान आ गयी हो वैसे चिहुँक उठी। मैं आगे झुका और उसके कान में धीरे से बोला- गेट रेडी फॉर फन! (मजे के लिए तैयार हो जाओ)

मैंने हल्के से उसकी पीठ पर रस्सी से मारा, वो सिहर गयी। उसके चेहरे पर एक क़ातिल सी मुस्कान थी। मुझे आज तक नहीं पता चला उसे इस दर्द में मजा कैसे आता था। लेकिन मैं उसके इस अंदाज़ से उत्तेजित काफी हो जाता था।
उसकी पीठ पर जब मैं रस्सी से मारता तो वो और भी कामुक अंदाज में वासना से कराह उठती।
होंठ भींच के कहती- वन मोर सर! (यानि एक और मारिए सर)

हर एक वार के साथ उसकी आह! निकल रही थी। उसकी आह में बहुत ही ज्यादा उत्तेजना थी। मैं उसकी चूत में लण्ड डाले हुए उसकी पीठ पर हल्के कोड़े बरसा रहा था। हालांकि मैं इस बात का पूरा ध्यान रख रहा था कि उसे चोट न लगे क्योंकि मैं अपनी बहन से बहुत प्यार करता हूँ। यह क्रिया सिर्फ उत्तेजना मात्र के लिए थी।

इस क्रिया से मेरी बहन भी काफी उत्तेजित हो रही थी। उत्तेजना से वो कामुक सिसकारियाँ ले रही थी- आहह! ओह्ह! ओह्ह! येस्स! … वन मोर! यस! जैसी आवाजें निकल रही थी।
मैं और भी उत्तेजित हो रहा था।

हालाँकि मेरा वार इतना तेज नहीं था फिर भी जब रस्सी उसकी मखमली कोमल पीठ पर पड़ती तो अपने पीछे हल्का सा लाल निशान छोड़ जाती। जोकि कुछ देर में गायब हो जाता। हर वार पर उसके मुँह से एक कामुक आहह निकलती जो मेरे जिस्म को रोमाँचित कर रही थी। बीच-बीच में मै उसकी पीठ को चूम लेता. कभी जीभ फेर देता. उसे इससे काफी आनंद मिलता।

हर चोट के साथ चुम्बन की क्रिया चल रही थी। मैंने कोड़े बरसाना बंद करके धक्के लगाना चालू किया। उसकी कामुक सिसकारियाँ कमरे में गूँजने लगी ‘आहह … आह … उहह … ओहहह … ओ माय गॉड यस! यस यस यस फ़क मी! चोदो मुझे! मेरे राजा … चोद के भुर्ता बना दो मेरी चूत का! यस! आहहह … ओह … उम्म ओ यस!

वो टेबल पर कुहनी रख कर उचक के चूत चुदवा रही थी। मैं उसकी नंगी पीठ को अपने बदन से सटा कर धक्के लगा रहा था।

अचानक मैंने धक्के लगाते हुए उसकी गर्दन पकड़ कर टेबल पर दबा दिया। वो टेबल पर पसर गयी, उसकी पीठ सामने आ गयी. मैंने धक्के लगाते हुए उसके पीठ पर रस्सी के कोड़े बरसाना चालू कर दिया।
लेकिन यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि मेरे कोड़ों का वार बस इतना था कि वो उत्तेजित हो. मुझे उसे चोट पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था।

इस दौरान पहली बार उसके चेहरे पर मुझे शिकन दिखी। शायद वो इस दोहरे आघात के लिए तैयार नहीं थी। लेकिन वो दर्द में भी कामुक सिसकारियाँ ले रही थी- आहह आहह … ओहह अहहह आऊच ओहह आह आहह आहहह की आवाजें कमरे में गूंज रही थी।

जब उसने इस क्रिया को अपना लिया तो वो गांड हिला-हिला के चुदने लग गई। मैंने लौड़ा उसकी चूत में से एक झटके में निकाला और उसकी गांड में डाल दिया। हालाँकि मैंने उसकी गांड चुदाई कई बार की है लेकिन अचानक हुए इस आघात से वो बिलबिला गयी। उसकी आँखों में आंसू आ गये.
उसने हाथ मेज़ पर पटक-पटक कर रुकने का इशारा किया. मगर मैं अपनी मस्ती में खोया हुआ था. उसके बाद जब मैंने उसकी हालत पर ध्यान दिया तो मैं रुका, उसके पास गया। उसकी आँखों में आंसू थे, वो रो रही थी।

मैं उसकी गांड में लण्ड डाले वैसे ही उससे सट कर उसके ऊपर लेटा रहा. उसकी पीठ को मैं अपने सीने तथा पेट के भागों में महसूस कर सकता था. उसकी पीठ एकदम गर्म हो गयी थी।

उत्तेजित होने के कारण मेरी सांसें बहुत तेज गति के साथ चल रही थीं. मैंने उनको सामान्य करने की कोशिश की. वो भी सामान्य होने की कोशिश में लगी हुई थी। मेरे बदन के स्पर्श से उसे काफी आराम मिला। वो धीरे-धीरे सामान्य होने लगी।

मैंने उसके गाल, कानों पर तथा कानों के पीछे गर्दन पर किस करना चालू किया. उसे अच्छा लगने लगा। मेरे लबों का स्पर्श पाते ही वो फिर गर्म होने लगी। उसने एक हाथ पीछे लाकर मेरे चेहरे को महसूस करने की कोशिश की. मैंने उसके हाथों को चूम लिया।

स्थिति सामान्य पाकर मैं हल्के-हल्के धक्के लगाने के बारे में सोचने लगा और मैं स्थिति को भांप कर धीरे से हल्के धक्के लगाने चालू किये।
प्रीति ने सिसकारियाँ लेना शुरू कर दिया- आहह … उम्म … ओहह … हूम्मम … याहहह. मैंने धक़्क़े तेज किये तो उसकी सिसकारियाँ तेज होने लगीं.
वो फिर से मजा लेकर चुदने लगी।

मैं उसे कंधे पर किस करते हुए उठा और हाथ में रखी रस्सी को उसके गले में फंसा कर अपनी तरफ खींचा. वो टेबल के किनारे को प्रतिरोध में पकड़े हुई थी फिर भी कुहनी के बल हल्की सी ऊपर उठी। उसकी नंगी पीठ जो लाल पड़ गयी थी थोड़ी ऊपर उठ गई। उसकी नंगी पीठ कामुक लग रही थी. मैंने उसकी पीठ पर किस किया और उसी अवस्था में उसकी गांड चुदाई स्टार्ट कर दी.

मेरी प्यारी बहन प्रीति कुछ बोल नहीं पा रही थी. बस कामुक सिसकारियां निकाल करके चुदाई का मजा ले रही थी। उसका सिर मेरी तरफ उठा हुआ था और आँखें बंद थीं। वो बस गांड में लण्ड का मजा ले रही थी। उसके माथे पर हल्की सी शिकन थी लेकिन उसके चेहरे से लग रहा था कि उसे मजा आ रहा है।

उसी अवस्था में मैंने उसे खड़ा करवाया और पास रखी कुर्सी पर एक पैर रखवा कर दोनों हाथ ऊपर करवा दिए। वो दोनों हाथ ऊपर किये हुए कुर्सी पर पैर रख कर मेरा लण्ड अपनी गांड में लिए हुए खड़ी थी. मैं उसकी पीठ से चिपक गया। हाथ से उसके बोबों को दबाते हुए उसके कान, गर्दन तथा कंधों के भाग में किस करते हुए उसकी गांड चुदाई करने लगा. इस पोज़ में वो ज्यादा ही कामुक लग रही थी। मैं उत्तेजित हो कर जोर-जोर से झटके लगाने लगा.

वो देर तक टिक नहीं पाई और स्खलित हो गई. उसकी चूत का रस बह कर उसकी जांघों से होता हुआ टांगों पर आ रहा था। मैं उसके रस को चखना चाहता था लेकिन इस पोज़ में संतुलन बनाने के लिए उसे पकड़े रहना जरूरी था।
वो एकदम गर्म हो चुकी थी। किसी रंडी की तरह मुझे गालियां बक रही थी- चोद बहनचोद … भड़वे, जब देखो मेरी गांड के पीछे पड़ा रहता है. आज मिली है, फाड़ दे इसे … चोद अहह .. आहहह .. आहह … और जोर से चोद … फाड़ दे मेरी गांड!

उसके मुंह से निकलने वाले ऐसे शब्द मुझे उत्तेजित कर रहे थे। मैंने उसके मुँह के पास उंगली ले जाकर उसे चुप करने का इशारा किया. पहले तो वह मेरे इशारे को नजरअंदाज करने लगी. फिर मैंने उसकी गांड में एक जोर का धक्का दिया और पूरा लंड जड़ तक अंदर घुसा कर फिर से उसके चेहरे के पास उंगली ले जाकर अपने होंठों पर रख कर समझाने की कोशिश की.

अबकी बार उसने मेरी तरफ ध्यान से देखा. मैंने अपने होंठों पर उंगली रखी हुई थी. मेरा लंड उसकी गांड में फंसा था.
मैं उसके कानों में बोला- रिमेम्बर … टूडे यू आर माय स्लट? (तुम्हें याद है न तुम मेरी रखैल हो आज …)
वो मुस्करा कर चुप हो गयी और गांड चुदाई का मजा लेने लगी।

कुछ देर इसी पोज में चोदने के बाद मैंने उसे डाइनिंग टेबल पर बैठा दिया और उसकी चूत से बह रहे रस को पीने लगा। वो आंख बंद करके चूत चटाई का मजा लेने लगी। मैं उठा और उसी पोज़ में उसकी एक टांग को उठाये एक ही झटके में अपने लण्ड को उसकी चूत में पेल दिया.

इस झटके से उसका मुंह खुल गया। मैंने मौके का फायदा उठा कर अपनी जीभ डाल कर उसका मुंह टटोल लिया। बड़े ही उत्तेजक तरीके से किस करते हुए उसकी चूत चुदाई करने लगा.

वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। आँखें बंद करके होंठ चुसाई का मजा ले रही थी। वो इतने उत्तेजक तरीके से मेरा होंठ चूस रही थी कि मैं रोमांचित हो गया था. मैंने धक्के तेज कर दिए. मैं उसके उछलते हुए मम्मों को अपने सीने पर महसूस कर सकता था।

चोदते-चोदते मैंने उसे गोद में उठा लिया. वो भी मेरे गले में बांहें डाले मेरे से एकदम चिपक गयी। उसे वैसे ही लेकर मैं कुर्सी पर बैठ गया। वो मेरे गले में बांहें डाले हुए थी. उसने मेरे चेहरे को अपने बोबों में दबा लिया और खुद उचक-उचक के चुदने लगी। मैं उसके मम्मों को अपने चेहरे पर महसूस कर सकता था।

उसके उरोजों से नाश्ते के दौरान लगाए गए जैम की खुशबू आ रही थी जो उसने मुझे नाश्ते में खिलाया था। यह पोज़ काफी उत्तेजक था.
आप समझ सकते हैं कि मेरे चेहरे पर उसके चूचे थे जिनमें से मादक मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी. मेरी बहन का कोमल बदन रौंदने के चलते मैं उसकी कोमलता को पूरे मजे के साथ महसूस करने लगा था. एक तरफ मेरा मुंह उसके चूचों पर लगा था और नीचे की तरफ मेरा लंड उसकी चूत को चोद रहा था.

ऐसी स्थिति में जो आनंद मुझे आ रहा था मैं आप लोगों को यहाँ पर शब्दों में बता नहीं सकता. उस वक्त ऐसा लग रहा था कि मेरी बहन कितनी मादक है जो अपने भाई को इतना मजा दे रही है. अगर दुनिया में कोई मजा है तो वह मेरी इस बहन की चुदाई करने में ही है. ऐसा लग रहा था मुझे उसकी चूत को चोदते हुए.

उसकी चूत में जाते हुए लंड का घर्षण मुझे उसकी चूत को फाड़ने के लिए मजबूर कर रहा था. मैंने उसके चूचों के निप्पलों को अपने दांतों में पकड़ कर काट लिया और उसकी जोर से एक कामुक सिसकारी निकल गई- उई मां … आह्ह् … मर गई.
उसको तड़पती हुई पाकर मेरे अंदर जैसे शैतान सा जाग उठा था. जिसके कारण मैं पूरी ताकत के साथ उसकी चूत में अपने लंड को धकेलने लगा. जितना जोर मुझसे लग सकता था मैं उसकी चूत में लंड को धकाने के लिए लगा रहा था.

इन जोरदार धक्कों का परिणाम यह हुआ कि मुझे असीम आनंद की प्राप्ति होने लगी. साथ में मेरी बहन के मुंह से निकलने वाली कामुक सिसकारियाँ और मीठे दर्द भरी आवाज जैसे आग में घी का काम करने लगीं.
मैंने ठान लिया कि इसकी चूत को फाड़ ही दूंगा आज. उसके शरीर को थामकर मैंने अपनी पूरी ताकत उसकी चूत में झोंक दी. आह्ह … मेरे चोदू भाई … मैं तो मर गई … ऐसे शब्दों के साथ वो बड़बड़ाने लगी.

उसकी ये बातें मुझे जैसे हवस की धारा में बहाए ले जा रही थीं. मैं ताबड़तोड़ उसकी चूत को रौंदने लगा और दो तीन मिनट के बाद मेरे अंदर की सारी ताकत मेरे लंड में आकर सिमट गई और उस ताकत ने मेरे वीर्य को बाहर आने पर मजबूर कर दिया. मैं उससे कस कर चिपक गया और उसकी चूत में ही झड़ गया। हम लोग काफी देर तक इसी अवस्था में पड़े रहे.
ऐसी गजब की चुदाई मैंने उसके साथ पहले कभी नहीं की थी. हम दोनों को सामान्य होने में दस मिनट से ज्यादा का वक्त लग गया. प्रीति की चूत सूज कर लाल हो चुकी थी. मेरा वीर्य उसकी चूत से बाहर बहता हुआ दिखाई दे रहा था.

जब हम दोनों भाई बहन की सांसें सामान्य हो गईं तो मैं उसे बाँहों में उठा कर बाथरूम में ले गया. दीदी मेरी गोद में बिल्कुल नंगी थी. मैं उसकी आंखों में देख रहा था और वो मेरी आंखों में देख रही थी. हम दोनों एक दूसरे में जैसे खोये से थे. उसके चेहरे पर संतुष्टि का भाव था।

यह कहानी तीसरे भाग में जारी रहेगी। आशा करता हूँ कि मेरी बहन के साथ आपको मेरी यह कामुक कहानी पसंद आ रही होगी. अगर आपको वास्तव में यह कहानी पसंद आई हो तो मेल करके जरूर बताएं.
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