मेरा पहला प्यार सच्चा प्यार-10


(Mera Pahla Pyar Saccha Pyar- Part 10)

वन्द्या 2019-03-20 Comments

This story is part of a series:

मेरी सेक्स कहानी में अब तक आपने पढ़ा कि मेरा यार मेरी चूत की बजाये मेरी गांड मारने की कोशिश करने में लग गया.
अब आगे:

जैसे ही आशीष ने अपना लंड का सुपारा मेरी गांड में घुसाने की कोशिश की, मुझे दर्द महसूस हुआ. मैं दर्द से कराहते हुए बोली- आशीष आराम से घुसाना … तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है और मेरी गांड बहुत नाजुक है.
आशीष बोला- तेरी गांड कयामत है बंध्या, ये सिर्फ चुदाई के लिए बनी है. तू देखना एक दिन बहुत बड़ी गंडमरी बनेगी. तू मेरी बात लिख ले, तेरे से ज्यादा गंडमरी लंड लेने वाली गांड चुदवाने वाली दूसरी कोई नहीं होगी.
ऐसा कहते हुए एक जोर का झटका मेरी गांड में आशीष ने पूरी ताकत से मारा, तो लगभग उसका आधा लंड मेरी गांड के अन्दर घुस गया.

उसके बाद उसने तुरंत दूसरा झटका मार कर पूरा लौड़ा अन्दर डाल दिया. पहले ही झटके में मैं बहुत जोर से चिल्लाई उम्म्ह… अहह… हय… याह… और लगा कि मर जाऊंगी, मैं इतना दर्द हुआ कि बेहोश होने की हालत में हो गई.
मैंने आशीष को बोला- हरामी यह करने के लिए मुझे यहां बुलाया है? मैं तुझे नहीं छोडूंगी … तू मुझे छोड़ दे, मुझे जाने दे … मुझे कुछ नहीं करवाना. मुझे छोड़ मादरचोद भोसड़ी वाले … तेरी ऐसी तैसी मैं सबसे बता दूंगी. मुझे छोड़ आशीष मादरचोद … मुझे बहुत दर्द हो रहा है.
मैं मम्मी मम्मी चिल्लाने लगी … तेजी से रोने लगी, पर आशीष ने मेरी गांड में अपना लंड रगड़ना और अन्दर बाहर करना जारी ही रखा. करीब चार पांच मिनट तक मेरे को बहुत जोर जोर से चोदा. फिर धीरे-धीरे से मेरी गांड का दर्द हल्का कम हुआ, लेकिन मैं तो रोए ही जा रही थी.

तब आशीष बोला- हर लड़की सुहागरात में रोती है. मेरे दोस्तों ने बताया है, तू मुझे एकदम फ्रेश माल मिली है. सच में मैं बहुत लकी हूं.
बस वो पीछे से मेरे पीठ पर चिपक कर जोर जोर से मेरी गांड चोदने लगा. अब तक मेरा दर्द लगभग खत्म हो गया था. अब मैं अपना पिछवाड़ा उछालने लगी. पीछे से आशीष मेरे दोनों दूध भी पकड़ कर पूरी ताकत से कसके दबाने लगा.
वो मेरी गांड मारते हुए बोला- बहुत मस्त आइटम है तू … तेरे से बड़ी माल मैं सोच भी नहीं सकता कि कोई होगी.

मैं कुछ नहीं बोली, बस एक कुतिया की तरह गांड मरवाती रही.

इसके बाद आशीष बोला- अब बंध्या सीधी लेट जा, मुझे तेरी चुत की चुदाई करनी है … जो मुझे खुद से भी ज्यादा प्यारी लगती है.
उसने मेरी गांड से अपना लंड बाहर निकाल लिया. इसके बाद आशीष ने मेरी पिछवाड़े में हाथ लगाकर मुझे सीधे लिटा दिया और अब अपने हाथों से आशीष मेरे दोनों टांगों को चौड़ा किया. मेरी एक टांग को अपने कंधे पर रख लिया और अपना लौड़ा हाथ से पकड़ कर मेरी चुत में जैसे ही रखा, लंड का सुपारा मेरी चुत की फांकों के बीच में छुआ, मैं उछल पड़ी और जाने क्या ऐसा हुआ कि मैंने अपनी कमर ऊपर करके उछाल दी, जिससे आशीष का लंड जल्दी से चुत में घुस जाए.

मेरी चुत अब तक वैसे भी बहुत गीली हो चुकी थी. चुत से निकलने वाला रस लगा हुआ था, तो बहुत चिकनी थी.

आशीष बोला- बहुत ज्यादा मत एक्साइटेड हो बंध्या … अभी तेरी सील टूटेगी. तुझे फिर से बहुत दर्द होगा. अब बंध्या तेरी सील मतलब अपनी होने वाली बीवी की, जो आगे होने वाली मेरी लाइफ पार्टनर है. तू मेरी तो आज हो गई. तेरी मैं अभी तेरी सील तोड़ूंगा. ये हर लवर या पति का ड्रीम होता है.
मुझे लंड लेने की पड़ी थी.

आशीष बोला- बंध्या, आज पहली बार मैं तेरी बहुत ही मस्त चुत की चुदाई करने वाला हूं, तू भी आज पहली बार मेरे से चुदवाएगी.
मैंने कहा- हां आशीष … जल्दी से आजा, मुझे अपना बना ले, मैं तेरे बिन पागल हुई जा रही हूं.

तभी आशीष ने पूरी ताकत से एक जोरदार झटका मेरी चुत में मारा और उसका आधा से भी ज्यादा लौड़ा, मेरी चुत में फच्च से घुस गया.
मैं बहुत जोर से चीखी और चिल्लाई- फट गई मेरी चुत … मार डाला रे बहुत दर्द हुआ …

मुझसे अब दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैं पागल सी होने लगी थी. मुझे बहुत तेजी से दर्द होने लगा.

मैं बोली- आशीष मुझे छोड़ दो, जाने दो यह मत करो, मत करो मुझे बहुत दर्द हो रहा है … मैं मर जाऊंगी, ये तूने बहुत तेजी से क्या डाल दिया आशीष.
आशीष बोला- डार्लिंग, तू बहुत मस्त है … तेरी बहुत टाइट चुत है … गजब की चुत है और चिल्ला साली.

उसने मेरे बाल पकड़कर गर्दन के पास कंधों में हाथ लगाकर अपनी और दबा दिया और जोर से डाला, तो आशीष का लौड़ा पूरा मेरी चुत में घुस गया. मैंने अपने पैरों को कैंची की तरह बनाकर उसके कमर से लिपटा दिया और आशीष से लिपट गई.
मैंने कहा- आशीष, बहुत तेज दर्द हो रहा है.
और मैं रोने लगी. सच में मेरे आंखों से आंसू आ गए. आशीष ने मेरे आंसुओं को हाथों से पौंछा और मेरे होंठों को चूमने लगा. मैंने अपना मुँह खोला तो उसने मेरी जीभ निकाल कर चूसने लगा और इधर कमर उछाल उछाल कर अपने लंड को मेरी चुत में रगड़ने लगा. अन्दर बाहर करने लगा.

आशीष अब जोर जोर से चुत में धक्के मारने लगा. करीब पांच मिनट की बेदम दर्द भरी चुदाई के बाद मेरी चुत का दर्द धीरे-धीरे कम होने लगा.
मैं आशीष को बोली- आशीष तुमने यह क्या किया … और यह कैसे हुआ … तू जादूगर है क्या … मुझे बहुत दर्द हो रहा था, पर अब जरा भी दर्द नहीं बचा. वाऊ मेरे राजा … आई लव यू …

मैं उसकी पीठ को नोंचने लगी. अन्दर से मेरे पता नहीं कैसी आग सी लगी कि मैं खुद अब अपने होश गवां बैठी. मुझे ये भी नहीं पता कि क्या बोलना चाहिए क्या नहीं, सब मेरे दिमाग से हट गया और मैं पागलों सी कुछ भी बके जा रही थी.

मैं बोली- आशीष तू बहुत बड़ा कुत्ता गांडू है … और जोर से मार मेरी चुत … पूरा लंड अन्दर घुसा भोसड़ी के … आशीष और तेज चोद … चोद आशीष … अहहभ ऊंहह आशीष और अन्दर लंड डाल उंहहह और जमकर चोद आशीष!

मैं उसके नाम की माला जपने लगी और उसके जीभ को मैं अपने होंठों से निकाल कर चूसने लगी. आशीष अपने हाथ मेरे दूधों पर रख कर कसके दबाने लगा. अब तो वो मेरे मम्मों को पूरी ताकत से उछाल उछाल के खींच खींच कर नोंचने लगा. आशीष एक जानवर बन गया था. मैं भी मचलने लगी थी. आशीष जम के मेरी चुत मसल मसल कर चोदे जा रहा था. उसका लंड मेरी जड़ तक घुसा जा रहा था. वो फिर लंड बाहर निकालता, फिर अन्दर तक घुसा कर धक्के मारने लगता. उसकी चुदाई से मैं पागल हो रही थी.

वह भी कुछ भी बके जा रहा था. वो बोला- बंध्या साली तू बहुत चुदक्कड़ है … मुझे ऐसी ही बीवी चाहिए थी, पर तेरी चुत तो बहुत गहरी है … मेरा लंड पूरा घुसने के बाद भी अन्दर पूरा नहीं पहुंच पा रहा. तुझे तो मेरे से भी बड़ा लौड़ा चाहिए है, यह मैं समझ गया. साली तेरे लिए मैं कुछ भी दवाई खाकर अपने लौड़े का साइज बड़ा करूंगा, तू बहुत चुदासी है.

मैं बोली- हां मेरे आशीष, सच में मैं बहुत चुदक्कड़ हूं … मेरा अपने आप बेहद चुदवाने का मन करता रहता है. आशीष तू हमेशा मेरी चुत में ऐसे ही अपना लौड़ा डाले रहना. शादी के बाद कभी भी मत निकालना … दिन रात मुझे ऐसे ही चोदना. मैं तेरे से सिर्फ चुदवाने के लिए ही शादी करूंगी और जोर जोर से डाल दे मादरचोद आशीष … बहनचोद और डाल पूरा लौड़ा … चोद मुझे जमके … और घुसा.
मुझसे रहा नहीं जा रहा है. मैं उत्तेज में उसकी पीठ को अपने नाखून से नोंचने लगी. उसके होंठों को काटने लगी.

आशीष बोला- तू तो पागल है रे … तेरे जैसी चुद्दक्कड़ चुदासी लड़की का मैंने सुना भी नहीं है … मैं कितना लकी हूं कि तू मेरी बीवी बनने वाली है, पर लगता नहीं कि पहली बार तू चुदवा रही है. साली लगता है कि तू पहले से चुदवाते आ रही है.
मैं बोली- नहीं, तू मेरा पहला मर्द है.

मैंने सच में उससे इस वक्त भी यही झूठ बोली, तब वह और मुझे कस के पकड़ के रगड़ने लगा. करीब 12-13 मिनट की बेदम चुदाई करने के बाद आशीष बोला- अब मुझे कुछ हो रहा है बंध्या … क्या बताऊं मेरे अन्दर खलबली मची हुई है. वो मेरे ऊपर कमर उठा उठा कर बहुत तेजी से झटके मारने लगा. आशीष अपना लौड़ा पूरा जड़ तक घुसाने लगा. वह मुझको बिल्कुल चिपक के पकड़ने लगा और मुझे बहुत गंदी गालियां देने लगा.

वो बोला- साली कुतिया तू बहुत बड़ी चुदक्कड़ है रे … मादरचोदी ले और चुदवा साली … बोल कितना चोदूं …

वो कस कसके मेरी चुत को चोदने लगा. मेरे मुँह से अपने आप निकलने लगा- ऊंहहह ऊंहहह ऊंहहह ओहह आहहहह मेरे चोदू राजा … और चोद आहहहह ऊंहहह आशीष और घुसा रे … आऊच्छ आशीष तेरा लौड़ा थोड़ा छोटा पड़ रहा है … क्या ये मेरी चूत जड़ तक नहीं पहुंच रहा. आशीष भोसड़ी के मेरी चुत की जड़ तक अपना लौड़ा पेल!
यह सब मैं जोर से बोले जा रही थी. आशीष ने तेजी से अपने लौड़े की स्पीड बढ़ाते हुए एकदम पूरा झटका मेरी चुत पर मारा और फुल स्पीड से चोदने लगा.

उसने इतना जोर से मुझे कंधे से जकड़ लिया कि मैं तड़पने लगी और फिर अचानक उसके लंड से बहुत गर्म लावा, उसका लंड रस मेरी चुत में भरने लगा. मुझे उसका एहसास हुआ, इतना गर्म लंड रस था कि मुझे लगा मेरी चुत जल जाएगी, पिघल जाएगी. पूरा रस आशीष के लौड़े का मेरी चुत में भर गया. मुझे बहुत मस्त मजा आने लगा. बहुत ही अजीब सी खुमारी मेरे अन्दर छा गई.

मैं आशीष से बोली- आशीष और डालो और करो और जोर-जोर से चोदो … बहुत मजा आ रहा है, तू बहुत मस्त चोदता है आशीष … और चोद आशीष, मैं तेरी चुदासी होने वाली बीवी हूं … और जोर से घुसा …

पर थोड़े ही पल में उसका लौड़ा एक मिनट भी नहीं लगा और सिकुड़ कर छोटा हो गया. आशीष हांफते हुए मेरे ऊपर ढेर हो कर लेट गया. वह पसीने में नहा गया था. मैं उसे बोलती रही- और करो आशीष … मुझसे रहा नहीं जा रहा, प्लीज और चोदो मैं तुम्हारी चुदासी होने वाली बीवी हूं … घुसा दो अपना लौड़ा जोर से … ऐसे मुझे तड़पते हुए मत छोड़ो … नहीं तो मैं कहां जाऊंगी … क्या करूंगी … प्लीज आशीष चोदो … तुम्हारे पैर पड़ती हूं, हाथ जोड़ती हूं … मुझे मसल दो, मेरी तड़प मिटा दो डालो अपना लंड … और चोदो जमकर अपनी चुदक्कड़ बंध्या को.

पर देखते ही देखते एक मिनट में उसका लंड सिकुड़कर बेहद छोटा होकर अपने आप मेरे चुत से बाहर हो गया और मेरे अन्दर की प्यास और आग नहीं बुझी.

मैं अधूरी सी लंड के लिए फुल चुदासी तड़प रही थी. मेरा बेहद मन कर रहा था कि मेरी जमकर और चुदाई हो कैसे भी हो. किसी तरह मेरा ये तड़पना ये मचलना खत्म हो जाए, पर आशीष उठकर मुझे बिना कुछ बोले जल्दी से मुझसे अलग हो गया.

यह मुझे बहुत खराब लगा. सच में किसी लड़की को कभी अधूरा पूरा संतुष्ट किये बिना नहीं छोड़ना चाहिए.

आशीष उठा और बोला- थैंक्यू बंध्या तुम बहुत अच्छी हो और फिर मेरी चुत के आसपास अपना हाथ लगा कर देखने लगा. वो चूत रस हथेली में लेकर बार बार देखने लगा, जैसे कुछ खोज रहा हो.
मैं बोली- आशीष क्या देख रहे हो … मैं तो अभी भी बहुत चुदासी और प्यासी तड़पती पड़ी हुई हूं.
आशीष बोला- बंध्या, तुम्हारी सील पहले से टूटी है, आज तो चुत की सील टूटने से निकलने वाला खून तो निकला नहीं … कहीं से भी एक भी बूंद नहीं टपकी.

मैं भी उठी और उसे आश्चर्य जनक तरीके से देखने लगी. मैं बोली- क्या हुआ, क्यों इतना घबराए हुए हो?
तो आशीष बोला- यार तुम्हारी सील तो टूटी नहीं, तुम इतना चिल्ला रही थी … इतना दर्द हुआ तुझे … तो मैंने सोचा सील टूट गई होगी, पर तेरी सील तो पहले से टूटी हुई है.

मैं अब उसकी बातों से थोड़ा नर्वस हो गई और शर्मिन्दा होने लगी … क्योंकि यह वह सच बोल रहा था. मेरी सील पहले से टूटी हुई थी. अगर अब ये मेरी सच्ची कहानी आशीष भी पढ़ेगा, तो उसे मैं जो कभी नहीं बतायी, आज बता दे रही हूं कि मेरी सील कब और कैसे टूटी. इसकी पूरी सच्चाई को एक एक शब्द लिख चुकी हूं. अन्तर्वासना में उस सत्य कहानी का टाइटल है ‘भाई की कुंवारी साली की सील तोड़ी..’ इसे पढ़कर आप मेरी सील टूटने की पूरी की पूरी सच्चाई जान सकते हैं. उस कहानी में मैंने जरा सा झूठ लिखा है कि कमलेश सर पहले मर्द है, जिन्होंने मुझे छुआ था, जबकि सच यह है कि कमलेश सर से पहले मुझे सोनम की दीदी की शादी में झाड़ी के पीछे दो लड़कों ने जबरदस्ती छुआ, फिर उसी रात जहां मवेशी बंधते हैं, वहां वो सोनम के मामा जी छू चुके थे. फिर सोनम के घर में आशीष के साथ रंगे हाथों पकड़ी गई थी. ये सब हो चुका था, उसके बाद कमलेश सर ने पढ़ाने के बहाने मुझे सेक्सी कहानियों की बुक, चुदाई वाली मैगज़ीन और ब्लू फिल्म की सीडी डीवीडी देने लगे थे. बाकी पूरी सत्य कहानी है … उसे पढ़ेंगे, तो आप होश खो बैठेंगे. मैं तो वो पहली बार का वो सब याद करके ही रोमांचित हो जाती हूं.

खैर … अब आशीष सीधे सीधे बोला कि बंध्या मुझे सच सच बता दो कि तुम्हारी सील कब और किसने तोड़ी? तुमने किससे फर्स्ट टाइम चुदवाया है … कौन है वह लकी मर्द? सच सच बता दोगी तो मुझे बुरा नहीं लगेगा, मैं वादा करता हूं कि तुम्हें कुछ नहीं बोलूंगा और हमेशा बहुत प्यार करूंगा. पर मुझसे कुछ मत छुपाओ.

मैं बोली- आशीष मैं तुम्हारी कसम खाती हूं … अपनी कसम भी खाती हूं कि तुम पहले मर्द हो, जिसने मुझे प्यार से छुआ है, जिसने मुझे प्यार किया है और जिसने मेरे साथ सेक्स किया है. तुमसे आज मैंने पहली चुदाई करवाई है. यह मेरी पहली सुहागरात है और वह भी आशीष अपने होने वाले पति के साथ की है … और रही बात सील टूटने की, तो मैं एक बार अपने भाई के दवारा लाई गई ब्लू फिल्म की चोरी से डीवीडी में लगा कर वीडियो देख रही थी, तब मेरा बहुत मन करने लगा था, तो कमरे में एक कोका कोला की कांच की छोटी बोतल रखी थी. वह खाली बोतल थी, तो मैं उसके ढक्कन की तरफ से अपनी चुत में डालने लगी थी. मेरा बहुत मन कर रहा था. मैंने पहले धीरे-धीरे उसे घुसाया, फिर मुझे कुछ समझ नहीं आया और कब मैं होश खो बैठी और जोश में जोर से बोतल अन्दर डाल कर घुसा ली. उसी वक्त मेरी चुत से खून बहने लगा और बहुत दर्द भी होने लगा था. मैं बहुत घबरा गई थी. गांव के एक डॉक्टर के पास भी सहेली के साथ गई, तो रास्ते में मैंने जब उसे बताया.
तो वह बोली- चल दिखा ले, पर तेरी सील टूट गई है. इसमें घबराने की कोई बात नहीं है.

उसने मुझे बहुत समझाया. फिर भी मैं डॉक्टर के पास गई और डाक्टर से झूठ बोली कि साइकिल चला रही थी, तो सीट का मुहाना थोड़ा यहां घिस गया और ब्लड निकला.

ऐसे बताकर डॉक्टर से टेबलेट लाई थी. दो-तीन दिन दर्द हुआ था. इस तरह से मैंने कैसे भी करके आशीष को समझाया और उसने मुझ पर बड़ी मुश्किल से भरोसा किया. रही बोतल वाली बात, तो वो पूरी सच थी. मैंने ऐसा किया था और दो चार बार कर चुकी थी, पर उससे मेरी सील नहीं टूटी. उससे कुछ नहीं हुआ था, मेरी सील कैसे किसने तोड़ी थी, यह तो आप जब उस मेरी कहानी को पढ़ेंगे, तभी सच्चाई का पता चलेगा. मेरी सील की सच्चाई कहानी में ही है, वो भी एक एक शब्द सही है.

इसके बाद मैं बेमन से बिस्तर से उठी, जबकि मेरा अभी भी चुदवाने का बहुत मन कर रहा था. लड़की के लिए अधूरी चुदाई से खराब कुछ नहीं होता, परन्तु मैं उठी और अपने कपड़े पहनने लगी. क्योंकि आशीष पहले ही अपने कपड़े पहन चुका था.

उसके बाद आशीष बोला- बंध्या चलो तुम्हें आज सुहागरात का गिफ्ट दिला दूं.
वह मुझे पन्नीलाल चौक ले गया, वहां पर उसने एक स्टोर से 12 सौ रुपए की व्हाइट कलर की बहुत अच्छी सी लॉन्ग फ्रॉक दिलवाई, मैं बहुत खुश हो गई मुझे आज तक किसी ने इतना महंगा ड्रेस नहीं खरीद कर दिया था. मैं उसे लेकर आशीष के पीछे से लिपट गई.

फिर उसने मुझे वहीं बस स्टैंड के पास सवेरा होटल के नीचे पहुंचा दिया, वहीं पर मेरी सहेली नीलू मिल गई. वो भी अपने किसी दोस्त से मिल के आई थी. हम दोनों बस में बैठे और वापस अपने गांव आ गए. मम्मी ने घर में पूछा कि बेटी तुम्हारा काम हो गया?
मैं बहुत खुश थी, मैं बोली- हां मम्मी अच्छे से हो गया … फॉर्म भी भर दिया है और एक यह फ्रॉक भी लाई हूं. मैंने थोड़े पैसे जुटाए हुए थे, उसी से ले ली.
मम्मी ने पूछा- ये तो महंगी लग रही है, कितने की है?
मैंने झूठ बोल दिया कि यह तो ढाई सौ रूपए की मात्र है.
मम्मी बोलीं- बड़ी सस्ती मिल गई तुझे … बहुत अच्छी है.

इस तरह से यह एक एक शब्द जो मैंने लिखा है, सब सच वैसा का वैसा ही हुआ था. इसके बाद बहुत सारी घटनाएं मुझे लिखने का मन है, जो लगातार जल्दी जल्दी घटी थीं, किस तरह से मैं आशीष के प्यार में पागल होकर बिगड़ती गई और आशीष मुझे बिगाड़ता रहा. मैं उसके प्यार में पागल हुई बस बिगड़ती चली गई. आगे कैसे क्या हुआ, वो सब कुछ मैं अलग अलग हिस्सों में लिखते हुए सारी सच्चाई आप सब पाठकों के सामने लाऊंगी.

आशीष के प्यार मैं खोकर मैं अंधी हो गई और इसके बाद मैंने अपनी पढ़ाई से नाता लगभग तोड़ लिया था. पढ़ाई में फिर मन ही नहीं लगा. मैं 2 साल लगातार नौवीं कक्षा में फेल हुई, उसके बाद कक्षा 10 वीं में पहुंची, पर फिर कक्षा 10 पास ही नहीं कर पाई.

मेरे घर में भी माहौल बिल्कुल सही नहीं था. हमेशा लोगों की नजर हमारे यहां दूसरे तरह की रही … और उससे मुझे और भी बल मिला. मेरी चढ़ती जवानी थी इससे भी मुझे कुछ समझ नहीं आया. मैं बिना कुछ सोचे आगे बढ़ती गई. किस तरह से मेरा जीवन रोमांच और आनन्द से भरपूर आगे बढ़ा, आप सच्चाई जानेंगे तो बिल्कुल हैरान रह जाएंगे. हर 4-6 दिन में एक विशेष घटनाक्रम से मैं जुड़ती गई … और यह समझ लीजिए कि उसमें मेरी सहमति, मेरी मर्जी और मेरी फैंटेसी, मेरी चाह भी सम्मिलित रहती थी.

आगे जो कुछ भी हुआ उसे पूरी सच्चाई के साथ आप पाठकों के सामने लाऊंगी, यह मेरा आपसे वादा है.

मेरी यह सच्ची दास्तान आपको कैसी लगी, मुझे इस पर अपनी राय और अपने कमेंट मेरी मेल आईडी पर जरूर दें.
[email protected]

What did you think of this story??

Comments

Scroll To Top